आज दिनांक 23 मार्च 2026 दिन सोमवार को महाविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा “विश्वजल दिवस” का आयोजन किया गया।(यह दिवस प्रतिवर्ष 22-03-2026 को मनाया जाता है, इस दिन रविवार होने पर यह कार्यक्रम आज दिनांक 23-03-2026को मनाया गया।) यह कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.यासर कुरैशी के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को जल संरक्षण के महत्व से अवगत कराना तथा जल और वनस्पतियों के परस्पर संबंध को समझाना था। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. यासर कुरैशी के प्रेरणादायक उद्बोधन से हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जल पृथ्वी पर जीवन का आधार है और इसके बिना किसी भी जीव का अस्तित्व संभव नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों को जल के महत्व को समझने तथा इसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने की प्रेरणा दी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती जनसंख्या और जल के अंधाधुंध उपयोग के कारण जल संकट की समस्या गंभीर होती जा रही है, इसलिए हमें जल के संरक्षण के प्रति सजग रहना आवश्यक है। इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक श्री नरहरि सिंह ने अपने उद्बोधन में जल संरक्षण की व्यावहारिक विधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने वर्षा जल संचयन, जल का सीमित उपयोग, जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने तथा पौधारोपण को बढ़ावा देने जैसे उपायों को अपनाने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर जल संरक्षण के छोटे-छोटे प्रयास करे तो भविष्य में जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। वनस्पति विज्ञान विभाग के अतिथि व्याख्याता श्री हरीश कुमार बघेल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि जल और वनस्पतियों का संबंध अत्यंत घनिष्ठ है। उन्होंने कहा कि पौधों की वृद्धि, प्रकाश संश्लेषण, खनिज लवणों के परिवहन तथा जैविक क्रियाओं के संचालन में जल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि यदि जल संसाधनों का संरक्षण नहीं किया गया तो इसका प्रतिकूल प्रभाव वनस्पतियों, कृषि तथा सम्पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ेगा। अतः जल संरक्षण के साथ-साथ वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। इसके पश्चात कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा जलसंरक्षण से संबंधित अपने विचार प्रस्तुत किए। साथ ही सभी विद्यार्थियों को जल बचाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की शपथ भी दिलाई गई। अंत में कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला सिद्ध हुआ।