आज दिनांक 02/02/2026दिन सोमवार को महाविद्यालय में विश्वआर्द्रभूमि दिवस का आयोजन वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा प्राचार्य डॉ. यासर कुरैशी के निर्देशन मेंकिया गया। आज के कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आर्द्रभूमियों केसंरक्षण एवं पर्यावरणीय महत्व के प्रति जागरूकता विकसित करना था। कार्यक्रम केप्रारंभ में सहायक प्राध्यापक श्री नरहरि सिंह ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन मेंकहा कि आर्द्रभूमियाँ पृथ्वी के सबसे उत्पादक पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक हैं, जो न केवल जैव विविधता का भंडार हैं, बल्कि भूजल संरक्षण, जलवायु संतुलन और प्रदूषण नियंत्रण में भीमहत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षणमें सक्रिय योगदान देने तथा स्थानीय आर्द्रभूमियों की सुरक्षा हेतु जन-जागरूकताफैलाने का आह्वान किया।वनस्पति विज्ञान विभाग के अतिथि व्याख्याता श्री हरीश बघेलने अपने संबोधन में आर्द्रभूमियों की पारिस्थितिक भूमिका तथा उनके संरक्षण कीअनिवार्यता पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगे कहा कि आर्द्रभूमियों का संरक्षण केवलसरकारी या सामाजिक उत्तरदायित्व नहीं, बल्किप्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है तथा उन्होंने बताया कि अत्यधिक भूमि दोहन, अवैज्ञानिक विकास कार्य, गंदे पानी का प्रवाह और जलवायु परिवर्तनआर्द्रभूमियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरे हैं।उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे पौधारोपण, स्वच्छता और जल संरक्षण जैसे छोटे कदमों सेबड़े बदलाव लाने में सहभागी बनें। विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान बढ़ाने केलिए स्थानीय आर्द्रभूमियों के मैदानी अध्ययन (Field Study) को अपनाने की सलाह दी। आज के कार्यक्रम ने छात्रों में पर्यावरणीयसंवेदनशीलता का विकास किया तथा उन्हें आर्द्रभूमियों की महत्ता समझाने मेंमहत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज के कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने बेहद उत्साहके साथ भाग लिया।विद्यार्थियों ने आर्द्रभूमि संरक्षण पर अपने विचार प्रस्तुतकिए।विश्व आर्द्रभूमि दिवस का यह आयोजन अत्यंत सफल रहा।